Tuesday, April 6, 2021

सैनिटाइजर बनाएं वायरस रहेंगे दूर।

 

कोरोना वायरस (Corona Virus) का संक्रमण ना सिर्फ चीन बल्कि भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है। इससे बचने के लिए डॉक्ट।र्स ने लोगों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न जानें की हिदायत दी है। साथ ही जब भी बाहर निकलें तो मास्क  लगा कर और हाथ को हैंड सैनिटाइजर से साफ करने की सलाह दी है। मगर, वायरस के चलते हैंड सैनेटाइजर ना सिर्फ महंगे हो गए है बल्कि खत्म भी होते जा रहे हैं। ऐसे में आप मार्कीट से खरीदने की बजाए घर पर ही अल्कोहलयुक्त सैंनेटाइजर बना सकती हैं, जो बाजार से मिलने वाले सैनेटाइजर की तरह ही काम करेगा।

सामग्री

  • एलोवेरा जेल
  • गुलाबजल
  • वोडका
  • टी ट्री ऑयल- 3 बूंद
  • लेवेंडर ऑयल – 4 बूंद
  • स्वींडर ज बोतल


घर पर इस तरीके से बनाएं हैंड सैनिटाइजर, सब वायरस रहेंगे दूर

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कोरोना वायरस (Corona Virus) का संक्रमण ना सिर्फ चीन बल्कि भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है। इससे बचने के लिए डॉक्ट।र्स ने लोगों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न जानें की हिदायत दी है। साथ ही जब भी बाहर निकलें तो मास्क  लगा कर और हाथ को हैंड सैनिटाइजर से साफ करने की सलाह दी है। मगर, वायरस के चलते हैंड सैनेटाइजर ना सिर्फ महंगे हो गए है बल्कि खत्म भी होते जा रहे हैं। ऐसे में आप मार्कीट से खरीदने की बजाए घर पर ही अल्कोहलयुक्त सैंनेटाइजर बना सकती हैं, जो बाजार से मिलने वाले सैनेटाइजर की तरह ही काम करेगा।

सामग्री:

  • एलोवेरा जेल
  • गुलाबजल
  • वोडका
  • टी ट्री ऑयल- 3 बूंद
  • लेवेंडर ऑयल – 4 बूंद
  • स्वींडर ज बोतल
  

      बनाने का तरीका

सबसे पहले आधी स्वीा।  ज बॉटल को एलोवेरा जेल से भर लें। अब इसमें गुलाबजल डालकर एलोवेरा जेल को थोड़ा पतला कर लें। अब इसमें थोड़ी-सी वोडका, 5 बूंद टी ट्री ऑयल व 6-7 बूंद लेवेंडर ऑयल मिक्से करें। बोतल को बंद करके अच्छीक तरह शेक करें, ताकि सारी चीजें मिक्सद हो जाएं। आपका हैंड सैनेटाइजर तैयार है।


क्यों फायदेमंद है यह सैनेटाइजर

इस हर्बल सैनेटाइजर में मौजूद टी-ट्री व लेवेंडर ऑयल बैक्टी‍रिया व वायरस का खात्मात करने के लिए बेस्टर है। वहीं इसमें मौजूद एलोवेरा जैल हाथों को ड्राई नहीं होने देगा। इसे लगाने से हाथ भी बिल्कु ल ड्राई नहीं होंगे। आप इसे अपनी पॉकेट या पर्स में भी कैरी कर सकती हैं। यह हाथों को बेहद सॉफ्ट व खुशबूदार भी रखेगा।

सैनेटाइजर से ज्यादा बेहतर है साबुन

भले ही कोरोना से बचने के लिए सैनेंटाइजर का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही हो लेकिन रिसर्च के अनुसार, साबुन ज्यादा बढ़िया होता है।

साबुन क्यों है बेहतर?

– सैनिटाइजर के इस्तेमाल से वायरस के मरने की गारंटी नहीं होती जबकि साबुन वायरस को प्रभावी तरीके से धो देता है।

– साबुन का पानी बिल्कुल अलग होता है, जिसमें फैट जैसे पदार्थ होते हैं। यह वायरस से लड़ने में अधिक सक्षम होते हैं।

– साबुन हाथ की त्वचा और वायरस के बीच परत बनाने का काम भी करता है।

– अगर आपकी हाथ की त्वचा रूखी है तो साबुन से ठीक तरह अपने हाथों को धोएं ताकि वायरस का खतरा पूरी तरह खत्म हो सके।

इस विडियो में देखिये >>


मुख़्तार अंसारी केस - एम्बुलेंस मामले में दोसी बनाया गया।

 मुख़्तार अंसारी केस - एम्बुलेंस मामले में दोसी बनाया गया।


बराबंकी की एंबुलेंस के मामले में दर्ज मुकदमे में मुख्तार अंसारी को साजिश और जालसाजी का आरोपी बनाया गया, मुकदमे में जालसाजी के साथ-साथ मुख्तार को 120 B का भी अभियुक्त बनाएगी पुलिस। फर्जी एंबुलेंस और डा. अल्का राय के बयान को मुख्तार पर मुकदमे का आधार बनाया गया है। 

#mukhtaransari #crime #uttarpradesh #shortnews

Monday, April 5, 2021

मास्क कोरोनावायरस से कितना बचाव करता है (Covid-19)

 

जानिए कौन सा मास्क कोरोनावायरस से कितना बचाव करता है

कोरोनावायरस से बचाव के लिए कौन सा मास्क खरीदें? यह सवाल ज्यादातर लोगों को जेहन में चलता है। हार्टकेयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. केके अग्रवाल के मुताबिक, वायरस से बचाव के लिए N95 मास्क ही सबसे बेहतर है। मास्क जब भी खरीदें तो ध्यान रखें इसकी रेटिंग N95 ही हो। दूसरी सबसे अहम बात इसका आपके चेहरे पर फिट होना जरूरी है, अगर ऐसा नहीं है तो इसका कोई फायदा नहीं होता। फेसमास्क के कुछ और प्रकार भी हैं जो वायरस से बचाव करते हैं, जानिए कौन का मास्क कितनी सुरक्षा देता है-

N95 मास्क

यह कोरोनावायरस जैसे संक्रमण से बचाव के लिए सबसे बेहतर मास्क है। यह आसानी से मुंह और नाक पर फिट हो जाता है और बारीक कणों को भी नाक या मुंह में जाने से रोकता है। यह हवा में मौजूद 95 प्रतिशत कणों को रोकने में सक्षम है इसलिए इसका नाम N95 पड़ा है। कोरोनावायरस के कण डायमीटर में 0.12 माइक्रॉन जितने होते हैं, जिसकी वजह से यह काफी हद तक मदद करता है। यह बैक्टीरिया, धूल और परागकणों से 100 फीसदी 

मास्क

N95 मास्क उपलब्ध न होने पर यह बेहतर विकल्प है। यह वायरस से 95 फीसदी बचाव करता है। वहीं बैक्टीरिया, धूल और परागकणों से 80 फीसदी तक सुरक्षा देता है। ये ढीले फिटिंग वाले होते हैं, इसलिए जब भी इसे लगाएं अच्छे से नाक और मुंह को कवर करें।

FFP मास्क

यह मास्क तीन कैटेगरी में उपलब्ध है। FFP1, FFP2 और FFP3, इसमें FFP3 सबसे बेहतर है। यह अतिसूक्ष्म कणों से बचाता है। FFP मास्क वायरस से 95 फीसदी और बैक्टीरिया-धूल-परागकणों से 80 बचाव करता है।

एक्टिवेट कार्बन मास्क

इसका इस्तेमाल आमतौर पर गंध रोकने के लिए किया जाता है। यह वायरस से बचाव करने में नाकाफी है क्योंकि महज 10 फीसदी तक ही सुरक्षा देता है। वहीं, बैक्टीरिया, धूल और परागकणों को रोकने में 50 फीसदी ही बचाव करता है

कपड़े वाला मास्क

यह वायरस से बचाव नहीं करता। न ही विशेषज्ञ इसे लगाने की सलाह देते हैं। आमतौर पर लोग इसे घर पर ही बनाते हैं। यह बैक्टीरिया, धूल और परागकण से 50 फीसदी ही बचाव करता है। इसे एक बार इस्तेमाल करने के बाद डिस्पोज करना बेहद जरूरी है।

स्पंज मास्क

यह मास्क वायरस से बिल्कुल नहीं बचाता। बैक्टीरिया और धूल से महज 5 फीसदी ही बचाव करता है। एक्सपर्ट भी इसे लगाने की सलाह नहीं देते।

मास्क कब पहनना चाहिए

1- जब आपमें संक्रमण के लक्षण दिखें, जैसे खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ

2- जब कोरोना से पीड़ित मरीजों की देखभाल कर रहे हो

3- आप एक स्वास्थ्यकर्मी है और मरीजों की देखभाल कर रहे हैं

मास्क पहनते समय क्या क्या ध्यान रखें

1- मास्क को हमेशा नीचे की तरफ से खोलें

2- मास्क गीला होने पर या 6 घंटे में इसे बदलें

3- मास्क अपनी नाक मुंह और ठोड़ी के ऊपर लगाएं. ध्यान रखें गैप ना हो और  ठीक से फिट हो

4- डिस्पोजेबल मास्क का दोबारा प्रयोग ना करें. प्रयोग हो चुके मास्क को कीटाणुरहित करके बंद कूड़ेदान में डालें

5- मास्क का प्रयोग करते समय या उतारते समय गंदी बाहरी सतह को ना छुएं

6- मास्को गर्दन पर लटकता हुआ ना छोड़ें

7- मास्क हटाने के बाद हाथों को साबुन या अल्कोहल आधारित हैंड रब से धोएं

Source – 

Sunday, April 4, 2021

हल्दी से कैंसर के इलाज के पेंटेंट को मंजूरी ! इस तरह होगा इलाज

 हल्दी से कैंसर के इलाज के पेंटेंट को मंजूरी ! इस तरह होगा इलाज


तिरुवनंतपुरम में श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस ने हल्दी से कैंसर के इलाज का अमेरिकी पेटेंट हासिल किया है। इंस्टीट्यूट का दावा है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व से कैंसर का इलाज किया जा सकता है। इंस्टीट्यूट के मुताबिक, कैंसर के ट्यूमर को शरीर से हटाने बाद हल्दी से इलाज किया जाएगा ताकि ट्यूमर खत्म करें और शरीर में फैलने से रोका जा सके। दोस्तों कृपया पोस्ट को अंत तक पढ़े

करक्यूमिन ही क्यों

प्रमुख शोधकर्ता डॉ. लिसी कृष्णन के मुताबिक, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन आसानी से शरीर में अवशोषित होता है और कैंसर से लड़ता है। कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए ट्यूमर वाले हिस्से में सीधे  करक्यूमिन रिलीज किया जाएगा। यह सामान्य कोशिकाओं को नुकसान न पहुंचाकर सीधे सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करेगा। कई रिसर्च में भी यह साबित हो चुका है कि यह कैंसर कोशिकाओं को खत्म करता है।

ऐसे होगा इलाज

संस्थान की डायरेक्टर आशा किशोरी के मुताबिक, शरीर में करक्यूमिन एक इम्प्लांट ‘वेफर’ के जरिए पहुंचाया जाएगा। वेफर में करक्यूमिन और एल्ब्यूमिन दोनों तत्व होंगे। सर्जरी से ट्यूमर हटाने के बाद इसे कैंसर वाले हिस्से में वेफर इम्प्लांट किया जाएगा। वेफर में मौजूद एल्ब्यूमिन तत्व कैंसर कोशिकाओं को इकट्ठा करेगा और करक्यूमिन इन कोशिकाओं में जाकर उसे खत्म करेगा।

यह शोध इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर किया गया है। पेटेंट मिलने के बाद अब इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू होगा और जल्द ही यह तकनीक कैँसर के मरीज के उपलबध होगी।

दोस्तों इसे राजीव दीक्षित ने 15 साल पहले ही बता दिया था, आगे ध्यान से पढ़िए >>

मित्रो कैंसर हमारे देश मे बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हाथ-पैर डाल चुके है । राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … ” कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment उसे दिया जाता है उससे death सबसे अधिक होती है ” । माने कैंसर से ज्यादा खतरनाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है ? ?आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया ।

इसमें क्या होता है के शरीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance power ! वो बिलकुल ख़तम हो जाती है । जब Chemotherapy दिए जाते है तो डाक्टर ये बोलते है की हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है लेकिन होता क्या है अच्छे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद राजीव भाई उसे बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage के cancer तक वो एक भी नही मर पाया !

मतलब क्या है Treatment लेने मे जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हाथ से गया । डॉक्टर आपको भूल-भुलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो मर ही जाता है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसी को कैंसर हो जाये तो ज्यादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते ।

उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है? इतना कष्ट क्यों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो,

और आप अपनी आस पड़ोस की बाते ज्यादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसी को गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आ के कहते है ‘ अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा …. अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते ” । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !!

हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पढ़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है ।

कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अच्छी दवा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दवा है Anti-Cancerous उसका नाम है ” हल्दी ” । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखती है ! कैसे ताकत रखती है वो जान लीजिये हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है ।

हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीज में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा-सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे ।
(देशी गाय की पहचान उसकी पीठ पर हंप होता है )

अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरह पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।

याद रखें इस दावा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है विदेशी जर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग की हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालकर ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दावा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अच्छे परिणाम देती है
।
जब स्टेज थर्ड क्रस करके फोर्थ में पहुँच गया हो तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दावा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy शुरू तो नही हो गयी ? अगर शुरू हो गयी है तो आप उसमे हाथ मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए .. इतना ही करे ।

और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई एलोपैथी treatment शुरू नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous (चमत्कारिक रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शरीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।

तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हैडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्भवती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है।

ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेशा जो खाना खाए उसमे डालडा घी (refine oil ) तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? हमेशा शुद्ध तेल खाये अर्थात सरसों ,नारियल ,मूँगफली का तेल खाने मे प्रयोग करें ! और घी अगर खाना है तो देशी गाय का घी खाएं ! गाय का देश घी नहीं !

ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रेशेदार हिस्सा ज्यादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली दाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।

और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तीन कारण है, एक तो कारण है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हाथ मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में । कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाओ ही इसका उपाय है ।

महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्भाशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शरीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है

लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है ” चुना ” । चुन वो ही जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है ।

सम्पूर्ण जानकारी को लिखना असंभव है ये कुछ जानकारी है।


Note - इसको इस्तेमाल करने में आप स्वतंत्र है हम इसके लिए जिम्मेदार नही है।

Wednesday, January 27, 2021

FAUG first impressions: looks good but it is no PUBG Mobile

 

FAUG first impressions: looks good but it is no PUBG Mobile

FAUG has been released in India and we played the game for a few hours to offer our initial thoughts.

Indian game developer nCore Games finally released the much-awaited FAUG game for download on Android while the iOS version will come out at a later stage. Set in the backdrop of the infamous Galwan Valley attack and riding on a wave of anti-China sentiments, FAUG was announced as an Indian-made title celebrating the heroics of the Indian army. The name FAUG was being considered as an Indian take on PUBG Mobile after the latter was banned in the country. However, nCore had clarified in an earlier interview that the developer has no intention of making a clone to the popular battle royale game. Now, on 26th January, I finally got my hands on the game, and here are my first impressions of the game mechanics, storyline, and what the future of FAUG looks like.

 is a third-person action RPG title with a size of 500MB and I played it on the OnePlus 8 Pro for a good graphical experience. On the main menu for the game, you will see three options which are Campaign, 5V5 Team Deathmatch, and Free for all. Currently, you can only play the Campaign while the other two modes are said to be coming soon. The onset of the story begins with a cinematic segment of stranded Indian soldiers of the FAU-G unit in Galwan Valley after an ambush in the night by unknown assailants (most likely Chinese troops, but it is not mentioned). We play as a soldier most likely from the Sikh regiment whose objective is to make his way towards his team while engaging in hand-to-hand combats with the enemy. The campaign’s tutorial makes us familiar with the game’s mechanics, movement options, and environment interaction. Talking about the settings, there are only options to change your graphics, audio, and sensitivity.

I played the game on the Ultra graphics settings to get take in the full scope of the game’s visual capabilities. From the initial trailer I saw back in December, I was no very impressed with how the game looked. Now with the game in my hand, my opinion has somewhat changed. Textures and detail in the environment are quite good while the frame rate is also set at a healthy 60fps. The virtual joystick for movement and the button for combat are both very responsive. There is no overall jittering in the gameplay when looking around the world. Dialogues can be heard crisply over the combat and weapons can be picked up just by walking over them. One big thing for people to know is that there will be no gun combat of any kind, at least for the amount of campaign I’ve played. The only combat objects that can be picked up appear to be a barbed-wire club and a metal pipe with a knife attached at one end.

Initial launches of games are not free of bugs and I did encounter a few. Sometimes defeated enemy troops stay suspended in the air for 5-6 seconds. Entering a nearby tent while engaged in combat can make the enemy forget that you are even there. Dialogue delivered by the player at regular intervals is tied to each checkpoint in the level. This means if you go back to a previous checkpoint the player will again repeat older dialogues. There is no bloodshed or graphic violence in the game instead the damage to enemy soldiers is shown as points being deducted from their health after each hit. Your own health and stamina are present at the top-left and you can replenish it by sitting next to a fire which is present at nearly all combat locations. The game follows a linear movement with objective markers showing where the player has to go next.

From what I could make out, FAUG is definitely not anything like PUBG and it is clear that it does not want to do that either. The gameplay focuses on hand-to-hand combat with the enemy and there are a couple of glitches here and there. I’m guessing the total time to beat the game would be about 2-3 hours after which the title will hold no meaning. At least until the 5V5 Team Deathmatch and Free for all modes are not introduced, the FAUG campaign will force you on a monotonous journey of battling the same kind of enemy troops. Stay tuned for a full review of the game. You can watch some of the gameplay footage in the link below.

FAUG

If you missed your train due to farmer protest today, check refund status here

 

If you missed your train due to farmer protest today, check refund status here

The unruly behavior by farmers caused a serious law and order situation in Delhi, forcing the authorities to block several roads.


Reported By: DNA Web Team | Edited By: Pravind Yadav | Source: DNA webdesk 

Farmers protest

Wednesday, January 6, 2021

Bird Flu 2021

 

Bird flu alert in Rajasthan, Animal Husbandry Minister calls emergency meeting to control the situation.


Bird flu cases in Rajasthan are increasing day by day which led authorities to announce a bird flu alert in the state. After the confirmation of virus, authorities are considering this as a very serious matter. The dreaded virus was confirmed in dead crows in the Jhalawar district and many other cities, including Jaipur and many important cities of Rajasthan.

It started on December 25 in Jhalawar. Most of the cases have been reported among crows, with most of them from Kota and Jodhpur. After that, the samples were sent to National Institute of High Security Animal Diseases Bhopal where the virus was detected. 


In concern to this, Animal Husbandry Minister Lalchand Kataria called an urgent meeting to make everyone alert of the situation and to take required action as soon as possible. He said that it is very serious matter and we can’t ignore it. That is why an urgent meeting of concerned officials has been called. He ensured that he and his team is monitoring and treating this issue on priority. He also informed that they are in contact with the Forest Department and the administration is on high alert.

Kunjilal Meena, State Principal Secretary, Rajasthan, informed that in order to control the situation, a response team has been formed which will work in various areas and report them the current situation. He added that it is very important to make people aware about it. That is why, pamphlet and posters will be put up to spread awareness among people. He also requested people to understand the situation and help them with their support.


YADU PHARMA

Pravind Yadav

Tuesday, January 5, 2021

Wisdom Teeth and Dental Pain

 A wisdom tooth or third molar is one of the three molars per quadrant of the human dentition. It is the most posterior of the three. The age at which wisdom teeth come through (erupt) is variable, but this generally occurs between late teens and early twenties Most adults have four wisdom teeth, one in each of the four quadrants, but it is possible to have none, fewer, or more, in which case the extras are called supernumerary teeth. Wisdom teeth may get stuck (impacted) against other teeth if there is not enough space for them to come through normally. Impacted wisdom teeth are still sometimes removed for orthodontic treatment, believing that they move the other teeth and cause crowding, though this is not held anymore as true  Impacted wisdom teeth may suffer from tooth decay if oral hygiene becomes more difficult. Wisdom teeth which are partially erupted through the gum may also cause inflammation and infection in the surrounding gum tissues, termed pericoronitis. Some more conservative treatments, such as operculectomies, may be fitting for some cases, yet impacted wisdom teeth are commonly extracted as treatment for these problems, many times before these problems even occur. Some oppose this prophylactic removal of disease-free impacted wisdom teeth, including among them the National Institute for Health and Care Excellence in the UK.

Wisdom tooth
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Wisdom teeth
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