Tuesday, October 11, 2022

आजीवन हिन्दू रहे गौतम बुद्ध......पूरा पढ़े।

आजीवन हिन्दू रहे गौतम बुद्ध..!वरदान

हमारे अनेक बुद्धिजीवी एक भ्रांति के शिकार हैं, जो समझते हैं कि गौतम बुद्ध के साथ भारत में कोई नया ‘धर्म’ आरंभ हुआ। तथा यह पूर्ववर्ती हिन्दू धर्म के विरुद्ध ‘विद्रोह’ था। यह पूरी तरह कपोल-कल्पना है कि बुद्ध ने जाति-भेदों को तोड़ डाला, और किसी समता-मूलक दर्शन या समाज की स्थापना की। कुछ वामपंथी लेखकों ने तो बुद्ध को मानो कार्ल मार्क्स का पूर्व-रूप जैसा दिखाने का यत्न किया है। मानो वर्ग-विहीन समाज बनाने का विचार बुद्ध से ही शुरू हुआ देखा जा सकता है, आदि।

लेकिन यदि गौतम बुद्ध के जीवन, विचार और कार्यों पर संपूर्ण दृष्टि डालें, तो उन के जीवन में एक भी प्रसंग नहीं कि उन्होंने वंश और जाति-व्यवहार की अवहेलना करने को कहा हो। उलटे, जब उन के मित्रों या अनुयायों के बीच दुविधा के प्रसंग आए, तो बुद्ध ने स्पष्ट रूप से पहले से चली आ रही रीतियों का सम्मान करने को कहा।

एक बार जब गौतम बुद्ध के मित्र प्रसेनादी को पता चला कि उन की पत्नी पूरी शाक्य नहीं, बल्कि एक दासी से उत्पन्न शाक्य राजा की पुत्री है, तब उस ने उस का और उस से हुए अपने पुत्र का परित्याग कर दिया। किन्तु बुद्ध ने अपने मित्र को समझा कर उस का कदम वापस करवाया। तर्क यही दिया कि पंरपरा से संतान की जाति पिता से निर्धारित होती है, इसलिए शाक्य राजा की पुत्री शाक्य है। यदि बुद्ध को जाति-प्रथा से कोई विद्रोह करना होता, या नया मत चलाना होता, तो उपयुक्त होता कि वे सामाजिक, जातीय परंपराओं का तिरस्कार करने को कहते। बुद्ध ने ऐसा कुछ नहीं किया। कभी नहीं किया।

बुद्ध का यह व्यवहार सुसंगत था। तुलनात्मक धर्म के प्रसिद्ध ज्ञाता डॉ. कोएनराड एल्स्ट ने इस पर बड़ी मार्के की बात कही है कि जिसे संसार को आध्यात्मिक शिक्षा देनी हो, वह सामाजिक मामलों में कम से कम दखल देगा। कोई क्रांति करना, नया राजनीतिक-आर्थिक कार्यक्रम चलाना तो बड़ी दूर की बात रही! एल्स्ट के अनुसार, ‘यदि किसी आदमी के लिए अपनी ही मामूली कामनाएं संतुष्ट करना एक विकट काम होता है, तब किसी कल्पित समानतावादी समाज की अंतहीन इच्छाएं पूरी करने की ठानना कितना अंतहीन भटकाव होगा!’

अतः यदि बुद्ध को अपना आध्यात्मिक संदेश देना था, तो यह तर्कपूर्ण था कि वे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व्यवस्थाओं में कम-से-कम हस्तक्षेप करते। उन की चिन्ता कोई ‘ब्राह्मण-वाद के विरुद्ध विद्रोह’, राजनीतिक कार्यक्रम, आदि की थी ही नहीं, जो आज के मार्क्सवादी, नेहरूवादी या कुछ अंबेदकरवादी उन में देखते या भरते रहते हैं। इसीलिए स्वभावतः बुद्ध के चुने हुए शिष्यों में लगभग आधे लोग ब्राह्मण थे। उन्हीं के बीच से वे अधिकांश प्रखर दार्शनिक उभरे, जिन्होंने समय के साथ बौद्ध-दर्शन और ग्रंथों को महान-चिंतन और गहन तर्क-प्रणाली का पर्याय बना 

यह भी एक तथ्य है कि भारत के महान विश्वविद्यालय बुद्ध से पहले की चीज हैं। तक्षशिला का प्रसिद्ध विश्वविद्यालय गौतम बुद्ध के पहले से था, जिस में बुद्ध के मित्र बंधुला और प्रसेनादी पढ़े थे। कुछ विद्वानों के अनुसार स्वयं सिद्धार्थ गौतम भी वहाँ पढ़े थे। अतः यह कहना उपयुक्त होगा कि बौद्धों ने उन्हीं संस्थाओं को और मजबूत किया जो उन्हें हिन्दू समाज द्वारा पहले से मिली थी। बाद में, बौद्ध विश्वविद्यालयों ने भी आर्यभट्ट जैसे अनेक गैर-बौद्ध वैज्ञानिकों को भी प्रशिक्षित किया। इसलिए, वस्तुतः चिंतन, शिक्षा और लोकाचार किसी में बुद्ध ने कोई ऐसी नई शुरुआत नहीं की थी जिसे पूर्ववर्ती ज्ञान, परंपरा या धर्म का प्रतिरोधी कहा जा सकता हो।

ध्यान दें, बुद्ध ने भविष्य में अपने जैसे किसी और ज्ञानी (‘मैत्रेय’, मित्रता-भाईचारा का पालक) के आगमन की भी भविष्यवाणी की थी, और यह भी कहा कि वह ब्राह्मण कुल में जन्म लेगा। यदि बुद्ध के लिए कुल, जाति और वंश महत्वहीन होते, तो वे ऐसा नहीं कह सकते थे। उन्होंने अपने मित्र प्रसेनादी को वही समझाया, जो सब से प्राचीन उपनिषद में सत्यकाम जाबालि के संबंध में तय किया गया था। कि यदि उस की माता दासी भी थी, तब भी परिस्थिति उस के पिता को ब्राह्मण कुल का ही कोई व्यक्ति दिखाती थी, अतः वह ब्राह्मण बालक था और इस प्रकार अपने गुरू द्वारा स्वीकार्य शिष्य हुआ। उसी पारंपरिक रीति का पालन करने की सलाह बुद्ध ने अपने मित्र को दी थी।आर्य वरदान धर्मयोद्धा कर्मवीर

इसीलिए वास्तविक इतिहास यह है कि पूर्वी भारत में गंगा के मैदानों वाले बड़े शासकों, क्षत्रपों ने गौतम बुद्ध का सत्कार अपने बीच के विशिष्ट व्यक्ति के रूप में किया था। क्योंकि बुद्ध वही थे भी। उन्हीं शासकों ने बुद्ध के अनुयायियों, भिक्षुओं के लिए बड़े-बड़े मठ, विहार बनवाए।

जब बुद्ध का देहावसान हुआ, तब आठ नगरों के शासकों और बड़े लोगों ने उन की अस्थि-भस्मी पर सफल दावा किया थाः ‘हम क्षत्रिय हैं, बुद्ध क्षत्रिय थे, इसलिए उन के भस्म पर हमारा अधिकार है।’ बुद्ध के देहांत के लगभग आधी शती बाद तक बुद्ध के शिष्य सार्वजनिक रूप से अपने जातीय नियमों का पालन निस्संकोच करते मिलते हैं। यह सहज था, क्योंकि बुद्ध ने उन से अपने जातीय संबंध तोड़ने की बात कभी नहीं कही। जैसे, अपनी बेटियों को विवाह में किसी और जाति के व्यक्ति को देना, आदि।

अतः ऐतिहासिक तथ्य यह है कि हिन्दू समाज से अलग कोई अ-हिन्दू बौद्ध समाज भारत में कभी नहीं रहा। अधिकांश हिन्दू विविध देवी-देवताओं की उपासना करते रहे हैं। उसी में कभी किसी को जोड़ते, हटाते भी रहे हैं। जैसे, आज किसी-किसी हिन्दू के घर में रामकृष्ण, श्रीअरविन्द या डॉ. अंबेदकर भी उसी पंक्ति में मिल जाएंगे जहाँ शिव-पार्वती या राम, दुर्गा, आदि विराजमान रहते हैं। गौतम बुद्ध, संत कबीर या गुरू नानक के उपासक उसी प्रकार के थे। वे अलग से कोई बौद्ध या सिख लोग नहीं थे।

पुराने बौद्ध विहारों, मठों, मंदिरों को भी देखें तो उन में वैदिक प्रतीकों और वास्तु-शास्त्र की बहुतायत मिलेगी। वे पुराने हिन्दू नमूनों का ही अनुकरण करते रहे हैं। बौद्ध मंत्रों में, भारत से बाहर भी, वैदिक मंत्रों की अनुकृति मिलती है। जब बुद्ध धर्म भारत से बाहर फैला, जैसे चीन, जापान, स्याम, आदि देशों में, तो यहाँ से वैदिक देवता भी बाहर गए। उदाहरण के लिए, जापान के हरेक नगर में देवी सरस्वती का मंदिर है। सरस्वती को वहाँ ले जाने वाले ‘धूर्त ब्राह्मण’ नहीं, बल्कि बौद्ध लोग थे!

अपने जीवन के अंत में बुद्ध ने जीवन के सात सिद्धांतों का उल्लेख किया था, जिन का पालन करने पर कोई समाज नष्ट नहीं होता। प्रसिद्ध इतिहासकार सीताराम गोयल ने अपने सुंदर उपन्यास ‘सप्त-शील’ (1960) में उसी को वैशाली गणतंत्र की पृष्ठभूमि में अपना कथ्य बनाया है। इन सात सदगुणों में यह भी हैं – अपने पर्व-त्योहार का आदर करना एवं मनाना, तीर्थ व अनुष्ठान्न करना, साधु-संतों का सत्कार करना। हमारे अनेक त्योहार वैदिक मूल के हैं। बुद्ध से समय भी पर्व-त्योहार अपने से पहले के ही थे। महाभारत में भी नदी किनारे तीर्थ करने के विवरण मिलते हैं। सरस्वती और गंगा के तटों पर बलराम और पांडव तीर्थ करने गए थे। अतः जहाँ तक सामाजिक और धार्मिक व्यवहारों की बात है, बुद्ध ने कभी पुराने व्यवहारों के विरुद्ध कुछ नहीं कहा। यदि कुछ कहा, तो उन का आदर और पालन करने के लिए ही। इस प्रकार, कोई विद्रोही या क्रांतिकारी होने से ठीक उलट, गौतम बुद्ध पूरी तरह परंपरावादी थे। उन्होंने चालू राजनीतिक या सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने की सलाह दी थी। वे आजीवन एक हिन्दू दार्शनिक रहे। डॉ. एल्स्ट के शब्दों में, ‘बुद्ध अपने पोर-पोर में हिन्दू थे।’ लेकिन ठीक इसी बात को नकारने के लिए बुद्ध धर्म की भ्रांत व्याख्या की जाती रही है। इसे परखना चाहिए।
आर्य वरदान धर्मयोद्धा कर्मवीर

Monday, October 3, 2022

पुरुषों के लिए लौंग के तेल के फायदे: पुरुषों की इन 6 समस्याओं को दूर करे लौंग का तेल, जानें प्रयोग का तरीका।

पुरुषों के लिए लौंग के तेल के फायदे: पुरुषों की इन 6 समस्याओं को दूर करे लौंग का तेल, जानें प्रयोग का तरीका

पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए लौंग का तेल काफी प्रभावी हो सकता है। जानते हैं पुरुषों के लिए लौंग के तेल के फायदे 

 

लौंग का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। इससे न सिर्फ आपके शरीर को गर्मी मिलती है, बल्कि शारीरिक कमजोरी भी दूर हो सकती है। साथ ही लौंग आपकी पाचन शक्ति को भी दुरुस्त करता है, लेकिन क्या आप लौंग के तेल के फायदों के बारे में जानते हैं। जी हां, लौंग का तेल पुरुषों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। यह डायबिटीज से लेकर पुरुषों में स्पर्म से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में प्रभावी हो सकता है। आज हम इस लेख में पुरुषों को लौंग के तेल से होने वाले फायदों के बारे में जानेंगे। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-




पुरुषों के लिए लौंग तेल के फायदे ( clove oil benefits for male hindi )


1. इनफर्टिलिटी की परेशानी

लौंग का तेल कामोत्तेजक को बढ़ाता है। यह पुरुष और महिलाओं दोनों की सेक्स लाइफ को बेहतर करने में प्रभावी होता है। लौंग एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल करने से इनफर्टिलिटी की समस्याओं से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।


2. कैंसर से करे बचाव 

लौंग का तेल कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में प्रभावी हो सकता है। यह पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर को बढ़ने से रोक सकता है। इस तेल में सुगंधित घटक यूजेनॉल और फ्लेवोनोइड कैंसर को रोकने में एक अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में आप लौंग के तेल का इस्तेमाल नियमित रूप से कर सकते हैं। यह आपके लिए काफी प्रभावी है।


3. टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाए

लौंग का तेल पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मददगार हो सकता है। साथ ही यह पुरुषों में कामेच्छा को बढ़ाता है। वहीं, स्पर्म काउंट और प्रजनन क्षमता में किसी तरह की परेशानी को दूर करने में भी प्रभावी है।


4. स्पर्म काउंट और गतिशीलता में सुधार

लौंग में कई तरह के आवश्यक पोषक तत्व जैसे- विटामिंस, फ्लेवोनोइड, एल्कलॉइड, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन पाए जाते हैं, जो शुक्राणुओं की संख्या बढ़ावा दे सकते हैं। साथ ही यह शुक्राणु की गतिशीलता में सुधार कर करने में आपकी मदद कर सकते हैं। ऐेसे में अगर आप लौंग एसेंशियल ऑयल अरोमाथेरेपी लेने से आपको काफी लाभ मिल सकता है। इसके अलावा आप लौंग के तेल का सेवन भी कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको डॉक्टर से उचित सलाह की आवश्यता है। 


5. नशे की लत छुड़ाए

पुरुषों के लिए लौंग का तेल काफी प्रभावी हो सकता है। यह नशे की लत को छुड़ाने में काफी लाभकारी है। अगर आप सिगरेट या फिर शराब की लत से दूर होना चाहते हैं, तो लौंग एसेंशियल ऑयल का नियमित रूप से हीट बाथ लें। इससे आपका मस्तिष्क शांत होगा। साथ ही बार-बार सिगरेट पीने की लालसा कम होगी। इसके अलावा आप लौंग का सेवन भी कर सकते हैं।

 

6. शीघ्र स्खलन से बचाव (Prevent quick ejaculation)

लौंग का तेल गर्म होता है, जो आपके शरीर में रक्त प्रवाह को बेहतर कर सकता है। साथ ही यह शरीर का तापमान भी बढ़ाता है। ऐसे में आप चिंता और स्ट्रेस से दूर रहते हैं, जिससे आपके शरीर में उर्जा और तंत्रिका उत्तेजना को बढ़ावा मिल सकता है। ऐसे में शीघ्र स्खलन की समस्या से जूझ रहे पुरुषों के लिए यह तेल काफी प्रभावी हो सकता है। 


कैसे करें लौंग के तेल का इस्तेमाल ( How to Use Clove Oil )

  • अगर आप लौंग एसेंशियल ऑयल का इस्तेमास कर रहे हैं, तो आप इसे अपने कमरे में स्प्रे कर सकते हैं। इसकी खुशबू आपके शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर कर सकता है। साथ ही आपके मन को काफी शांति मिलती है। 
  • अरोमा थेरेपी में भी लौंग के तेल का इस्तेमाल होता है। जो आपके मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ कई अन्य समस्याओं को दूर करने में प्रभावी है।
  • इसके अलावा लौंग एसेंशियल ऑयल का इस्तेमाल डिफ्यूजर में भी किया जा सकता है।
  • वहीं, कुछ लोग लौंग के तेल के अपने दांतों की समस्या को दूर करने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। 

लौंग का तेल स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी हो सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि इसका इस्तेमाल अधिक मात्रा में न करें। वहीं, अगर आप इसका सेवन सीधे तौर पर करना चाहते हैं, तो एक बार डॉक्टर से जरूर परामर्श लें। क्योंकि लौंग की तासीर काफी गर्म होती है, जिसकी वजह से आपको कई तरह की समस्याएं भी हो सकती हैं।

Sunday, October 2, 2022

लाल बहादुर शास्त्री जी कितने महान थे।




भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री सादगी व महानता की प्रतिमूर्ति थे। उनके जीवन के अनेक प्रसंग हम सबके लिए प्रेरणादायक हैं। बात तब की है, जब शास्त्री जी इस देश के प्रधानमंत्री के पद को सुशोभित कर रहे थे। एक दिन वे एक कपड़े की मिल देखने के लिए गए। उनके साथ मिल का मालिक, उच्च अधिकारी व अन्य विशिष्ट लोग भी थे। मिल देखने के बाद शास्त्री जी मिल के गोदाम में पहुंचे तो उन्होंने साड़ियां दिखलाने को कहा। मिल मालिक व अधिकारियों ने एक से एक खूबसूरत साडिय़ां उनके सामने फैला दीं। शास्त्री जी ने साडिय़ां देखकर कहा, ‘‘साड़ियां तो बहुत अच्छी हैं, क्या मूल्य है इनका?’’ 



‘‘जी, यह साड़ी 800 रुपए की है और यह वाली 1 हजार रुपए की है।’’ मिल मालिक ने बताया।
‘‘ये बहुत अधिक दाम की हैं। मुझे कम मूल्य की साड़ियां दिखलाइए।’’ शास्त्री जी ने कहा। 
यहां स्मरणीय है कि यह घटना 1965 की है, तब 1 हजार रुपए की कीमत बहुत अधिक थी।
‘‘जी, यह देखिए। यह साड़ी 500 रुपए की है और यह 400 रुपए की।’’ मिल मालिक ने दूसरी साडिय़ां दिखलाते हुए कहा। 



‘‘अरे भाई, यह भी बहुत कीमती हैं। मुझ जैसे गरीब के लिए कम मूल्य की साड़ियां दिखलाइए जिन्हें मैं खरीद सकूं।’’ शास्त्री जी बोले।
‘‘वाह सरकार, आप तो हमारे प्रधानमंत्री हैं, गरीब कैसे? हम तो आपको ये साड़ियां भेंट कर रहे हैं।’’ मिल मालिक कहने लगा।
‘‘नहीं भाई, मैं भेंट में नहीं लूंगा।’’ शास्त्री जी स्पष्ट बोले। 



‘‘क्यों साहब? हमें यह अधिकार है कि हम अपने प्रधानमंत्री को भेंट दें।’’ मिल मालिक अधिकार जताता हुआ कहने लगा। ‘‘हां, मैं प्रधानमंत्री हूं।’’ शास्त्री जी ने बड़ी शांति से जवाब दिया, ‘‘पर इसका अर्थ यह तो नहीं कि जो चीजें मैं खरीद नहीं सकता, वह भेंट में लेकर अपनी पत्नी को पहनाऊं। भाई, मैं प्रधानमंत्री हूं पर हूं तो गरीब ही। आप मुझे सस्ते दाम की साड़ियां ही दिखलाएं। मैं तो अपनी हैसियत की साडिय़ां ही खरीदना चाहता हूं।’’ मिल मालिक की सारी अनुनय-विनय बेकार गई। देश के प्रधानमंत्री ने कम मूल्य की साड़ियां ही दाम देकर अपने परिवार के लिए खरीदीं। ऐसे महान थे शास्त्री जी, लालच जिन्हें छू तक नहीं सका था।

Friday, September 30, 2022

Jallianwala Bagh of South 2022

Do you know about Jallianwala Bagh of South?

In 1948,Nizam’s police made 200 Hindus stand in a line & sh0t them dead.

Their crime? Refusal to pay Jizya tax. 

This happened in Bhairanpally.

While Jallianwala Bagh is taught in schools, Bhairanpally massacre is ignored.

Thread : 


Tuesday, September 27, 2022

आसनसोल के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी के खिलाफ सीआईडी जांच पर रोक का निर्देश।





जितेंद्र तिवारी के खिलाफ सीआईडी जांच पर रोक का निर्देश। कोयला तस्करी की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ समानांतर सीआईडी द्वारा की जा रही जांच के दौरान आसनसोल के पूर्व मेयर भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी को बीते दिनों अंडाल थाने के मामले की जांच के लिए तलब किया गया था उन्हें इस मामले में गवाह के तौर पर बुलाया गया था इसके बाद जितेंद्र तिवारी सीआईडी के सामने हाजिर नहीं हुए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था आज हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ जांच पर रोक लगा दी है।
बात दे कि जितेंद्र तिवारी आसनसोल के जनसेवक नेता मने जाते है जनता के बीच इनका बहुत उत्साह रहता है इन्ही कारणों से TMC इनको रोकने का प्रयास कर रही है।

Monday, September 26, 2022

Shiva in his five-headed

Shiva, Parvati and Nandi.

Shiva in his five-headed (Panchanana) form seated with Parvati, the bull Nandi at their feet, and to either side an attendant.

1820,

Thanjavur, India

Saturday, September 24, 2022

People's Liberation Army overtakes China , Chinese Premier Xi jingping under house arrest.

People's Liberation Army overtakes China , Chinese Premier Xi jingping under house arrest.
 


Is Xi jingping under house arrest in Beijing ? When Xi was in Samarkand recently, the leaders of the Chinese Communist Party were supposed to have removed Xi from the Party's in-charge of Army. Then House arrest followed. So goes the rumour," BJP leader Subramanian Swamy said in a tweet. 

Videos are coming out slowly military moving toward Bejing , Censorship of Media and Social Media makes it hard to pin point time to time happening.



#breakingnews #chinaundermilitarycontrol

Sunday, September 18, 2022

Chandigarh University: Intimate Videos Of Girl Students In Hostel Bathroom Allegedly Leaked Online; Accused Arrested

Chandigarh University: Intimate Videos Of Girl Students In Hostel Bathroom Allegedly Leaked Online; Accused Arrested


Chandigarh University has not yet issued any official statement on the matter and it is also being reported that the management of the university was trying to suppress the case.

Chandigarh University has not yet issued any official statement on the matter and it is also being reported that the management of the university was trying to suppress the case.

In a shocking incident, an inappropriate video of girl students in Chandigarh University was allegedly leaked by a fellow student. In the girl's hostel of the university, a girl student allegedly recorded a video of around 60 other students while taking bath and later uploaded it to an adult website. However, Chandigarh University has denied all such things and stated that these 'objectionable videos' are just rumours. 

After the girls were made aware of the situation, the chaos started on the campus as students flooded it with demands for justice. The accused was taken into custody. It was also reported, that 8 of the students tried to take their life and attempted suicide, however, Mohali SSP denied the same and said no suicide and related death has been reported till now. Punjab Government has ordered a high level probe into the matter, informed Punjab CM Bhagwant Mann via Twitter.

Video Link Video

Tuesday, August 30, 2022